विश्व धरोहर दिवस है आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित विरासत सौंपने का संकल्प!


Post Date : 18/04/2017

हर साल विश्व धरोहर दिवस 18 अप्रैल को मनाया जाता है. विश्व धरोहर दिवस मौका है अपनी विरासत को सहेजने का. यह खास मौका है इसे सलामती के साथ अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित सौंपने का संकल्प लेने का.1982 में पड़ी थी विश्व धरोहर दिवस की नींव- फ्रांस आधारित अंतर्राष्ट्रीय स्मारक और स्थल परिषद् ने 1982 में इस दिन की घोषणा की थी. यूनेस्को की आम सभा ने 1983 में 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस की मंज़ूर दी. इस दिन का मकसद है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर सुरक्षित बना रहे. विकास की दौड़ में आने वाली पीढ़ी का उसकी धरोहर की जड़ो से नाता जोड़े रखने के लिए यह दिन मनाया जाता है. विश्व धरोहर दिवस एक अवसर है धरोहर को पैदा होने वाले खतरों के बारे में समय रहते जागरूक होने का. ये खतरें कैसे भी हो सकते है, विकास की राह में बढ़ते शहरीकरण से, आबादी के दबाव में रख-रखाव की कमी से, गैर जिम्मेदाराना बर्ताव के चलते, गंदगी से या फिर युद्धग्रस्त क्षेत्रों में जारी हिंसा से. विश्व धरोहर दिवस मानाने का मकसद है विरासतों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित रखने का संकल्प लेने का. इस साल के विश्व धरोहर दिवस का विषय है सांस्कृतिक विरासत और सतत पर्यटन. धरोहर को सुरक्षित बनाने के लिए जितनी भूमिका सरकारें, यूनेस्को, अंतर्राष्ट्रीय इकाईयां या संगठन निभाते है उतनी ही अहम भूमिका आम नागरिकों की भी है.


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