बेटे की चाहत में बढ़ रही जनसंख्या!


Post Date : 10/07/2017

हमारे राष्ट्र की एक गंभीर समस्या जनसंख्या विस्फोट की है। पुत्र की चाहत में लगातार बच्चे पैदा करना जनसंख्या वृद्धि के लिए जिम्मेदार है जो कि एक चिन्तनीय विषय है। हमने किसी क्षेत्र में प्रगति की हो या न की हो परन्तु जनसंख्या वृद्धि के मामले में हम विश्व के अनेक देशों से काफी आगे है। इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि 1947 में भारत की आबादी 34.20 करोड़ थी जो अब अनुमानत 1 अरब 25 करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी है। भारत में विश्व का 2.4 प्रतिशत भू भाग है जिसमें विश्व की लगभग 15 प्रतिशत आबादी निवास करती है। देश की जनसंख्या वृद्धि की स्थिति गहन चिन्ता का विषय है।>br> बहुत कम मिली है सफलता चाहे अस्पताल हो या रेलवे स्टेशन, स्कूल हो या दुकान हर जगह भीड़ ही भीड़ है। सरकार जितनी भी व्यवस्थायें उपलब्ध करा रही है सब कम होती जा रही है. जिसके कारण न अस्पताल में आसानी से दवा मिलती है न रेल में आरक्षण। बच्चों का स्कूल में प्रवेश बड़े ही भाग्यशाली लोगों को मिलता है। तीन आदमियों की क्षमता वाले मकान में 30-30 आदमी रहने के लिये बाध्य है और इस सारी समस्या की जड़ है बढ़ती हुई आबादी। अपने देश में जनसंख्या वृद्धि को सीमित करने के लिये 1942 में राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण मृत्यु दर में तो कमी लाने में कुछ सफलता अवश्य मिली। परन्तु जन्मदर कम कर पाने में असफलता ही हाथ लगी. जिसके कारण जनसंख्या वृद्धि का ग्राफ बहुत तेजी से ऊपर उठ रहा है। अपने देश में जनसंख्या वृद्धि का प्रमुख कारण है गरीबी।
ऐसा देखा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के यहां मनोरंजन के साधनों का अभाव होता है जनसंख्या वृद्धि के कारणों में अन्य प्रमुख कारण है कम उम्र में विवाह होना। कानून बनने के बाद बाल विवाहों में तो कुछ कमी अवश्य आयी है परन्तु अभी पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है। भारतीय समाज में लड़के की चाहत भी जनसंख्या वृद्धि के लिये काफी कुछ जिम्मेदार है। सरकार द्वारा चलाया जा रहा परिवार नियोजन अब परिवार कल्याण कार्यक्रम अभी भी जनता का कार्यक्रम नहीं बन पाया है। इसे जनता द्वारा मात्र सरकारी कार्यक्रम ही समझा जाता है।


© 2016 -2017 HindustanResult.com All Rights Reserved